!!! जोस नाम का शख्स जिसने 438 दिन महासागर में छोटे से बोट पर अकेले रहने का  वर्ल्ड रिकार्ड्स बनाया था !!!


       पैसिफिक ओसियन हमारे सोच से भी काफी बड़ा है चिले के बाजु के समंदर पर प्रशांत महासागर में अगर धरती के आरपार सुराग किया जाये तो तभी वो सुराग पृथ्वी के दूसरे साइड में पसिफ़िक ओसियन में ही निकलेगा दुनिआ में कुल मिलाके 5 ओसियन पाये जाते है इनमे से सबसे बड़ा ओसियन पसिफ़िक ओसियन माना जाता है . और ये टोटल 165 मिलियन स्क्वायर किलोमीटर्स फैला हुआ है . आपको ये बात जानकर आश्चर्य होगा की पृथ्वी की कुल जमीन ही 148 वर्ग किलोमीटर है . जिसका मतलब ये हुआ कि दुनिया के बाकि 4 ओसियन को हटाया जाये तो पसिफ़िक महासागर ही हमारे पहाड़ों , आइलैंड , रेगिस्तान , फारेस्ट से भी काफी बड़ा है . इस पुरे ओसियन में कुछ  आइलैंड है वो भी इतने छोटे है की इस आलीशान और विशाल ओसियन के सामने एक पॉइंट के बराबर दीखते है . और सोने पे सुहागा इनमेसे कही आइलैंड पर इंसान ने पैर तक नहीं रखा . यानि कुल मिलाकर बात की जाये तो इस विशाल ओसियन में गुम हो जाये तो उसे ढूंढ़ने का चांस न के बराबर है . 
      लेकिन आज आप ऐसे इंसान की रियल स्टोरी जानेंगे जो अपनी छोटी सी बोट पर गुम हो गया था .और वो भी 10 या 15 दिनों तक नहीं बल्कि पुरे 438 दिन तक . जी हा इस शख्स से एक्सीडेंटली एक ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया था जिसको कोई चाहते हुए भी तोड़ना पसंद नहीं करेगा समंदर में अकेले सबसे ज्यादा वक्त गुजरने का वर्ल्ड रिकॉर्ड जोस सल्वाडोर अल्वेरेंगा नमी शख्स ने बनाया था . जिसने पुरे 438 डेज गुजरे वो भी एक 7 फुट की एक छोटी सी बोट पर लेकिन सवाल ये है की आखिर ये शख्स 14 महीनो तक समंदर में जिन्दा कैसे रहा . लेकिन इससे पहले ये जानेंगे कि ये आखिर समन्दर में गया क्यों था. 
     ये बात है 2012 की जब मैक्सिको के छोटे गाँव कोस्टा अज़ुल में जोस अल्वरींगा नमी ये शख्स रहता था . जोस तब 36 साल का था और वो बेहतरीन मछवारा भी था . 17 नवम्बर 2012 को जैसे अपने साथी के साथ फिशिंग के लिए अपनी छोटी बोट के साथ रवाना हुआ . इनका प्लान बना था की वो समन्दर में कुछ 30 घन्टे गुजरेंगे इसलिए बोट पर ज्यादा सामान भी नहीं था. इस 7 फुट वाली बोट में एक इंजन और एक छोटा रेफ्रीजिरेटर था जिसमे वो मछलिया स्टोअर करते थे . अपने साथ एक दिन का खाना लेके जाने वाले जोस को कहा मालूम था की उसके अगले 438 दिन मुश्किल होने वाले है . वो मैक्सिको के किनारे से 120 किलोमीटर्स दूर गए और वह उन्होंने अपना जाल समंदर में बिछा दिया . उसी वक्त एक खौफनाक समंदर तूफान आ पोहचा . अपनी जान बचने के लिए मछली का जाल उधर ही छोड़ कर किनारे के तरफ भागे . पूरे 6 घण्टे बोट को तेज रफतार से भगाते हुए सुबह के 6 बजे वो किनारे से सिर्फ 20 किलोमीटर दूर थे और उनको अपना गांव भी नजर आने लगा था. वो उस तूफान को तो काफी दूर छोड़ आये थे लेकिन अब उनकी किस्मत काम करना छोड़ गयी थी. किनारे से 20 किलोमीटर की दूरी पर अचानक बोट का इंजन खराब हो गया था . अब नहीं उनके पास चप्पु थे और नहीं उनके पास बोट डायरेक्शन कंट्रोल करने वाला सेल , लेकिन उनके पास एक रेडियो था जिसके जरिये उनोन्हे अपनी लोकेशन बॉस को भेजी और उनके जवाब का वेट करने लगे लेकिन उसके बाद जो हुआ वो हर मछुवारे का घिनोना ख्वाब होता है . उनके बॉस के जवाब का वेट करते करते रेडियो. की बैटरी भी जवाब दे गयी और अब अब इन दोनों मछुवारो का बहार के दुनिया से कांटेक्ट खत्म हो चूका था . जैसे अल्वरींगा और उसका साथी शौक में थे कि जो भी हुआ उसका अंदाजा भी नहीं था तेज ह्वावो ने उनको समंदर में ढकेलना शुरू कर दिया था और उनको जो किनारा नजर आ रहा था वो भी अभी धीरे धीरे दिखना कम हो रहा था. उनके बॉस ने एक सर्च टीम भी बनाई और उनको पैसिफिक ओसियन में भी ढूंढा पर अब बोहोत देर हो चुकी थी क्युकी जैसे जैसे दिन गुजरते जा रहे थे वैसे जोस और उनके साथी का बचना काफी मुश्किल समझा जा रहा था . इस हादसे को 5 दिन गुजर चुके थे और हवावोने जोस की बोट को 450 किलोमीटर किनारे से दूर ढकेल दिया था वो समन्दर के ऐसे हिस्से में पोहच चुके थे जिससे हर डायरेक्शन में पानी ही पानी नजर आ रहा था उनको मालूम था की उनकी बोट इतनी छोटी है की उनको दूर से भी स्पॉट नहीं किया जा सकता नहीं उनके पास फ्लारे गन थी और नहीं वो आग जलाकर धुंए से सिग्नल दे सकते है . यानि के जैसे अल्वरींगा और उनके साथी को पता चल चूका था की उनके बचने का चांस अब 1% से भी कम है जो खाना पीना साथ लाये थे वो पहले ही खत्म हुआ था . अब पेट भरने के लिए अपने हाथोसे ही परिंदों को पकड़ना शुरू किया जो आकर बोट पे बैठे थे , या फिर बोट के आस पास आने वाली मछलियों को पकड़ कर कच्चे ही खाने लगे समंदर का खारा पानी पीने से इंसान की मौत हो सकती है इसी वजह से उनोन्हे बारिश का पानी समंदर में तैरने वाली प्लास्टिक बोतल में जमा करके पीना शुरू किया लेकिन बारिश कही दिनों तक नहीं पड़ती थी तभी वो प्यास बुझाने के लिए मछलियों और टोर्टल का खून पीते थे . वो भी तब जब वो उन्हें पकड़ने में कामयाब होते थे . दिन गुजरते गए और फिर महीने ये दोनों जिस मेंटल टॉर्चर से गुजर रहे थे वो इमेजिन करना भी हमारे लिए मुश्किल है . आखिरकार जोस का साथी ये टॉर्चेर बर्दाश्त नहीं कर सका और 4 महीनो के बाद फिर उसने सुसाइड कर लिया . अब इस छोटी सी बोट पर जोस के साथ बात करने के लिए भी कोई नहीं था और वो चारो तरफ घिरे समंदर में अकेला जिंदगी गुजार रहा था.
      अब मैप में देखा जाये तो जैसे पसिफ़िक ओसियन के इस हिस्से में था और ये हिस्सा दुनिया का खामोश ऐसा हिस्सा माना जाता है . यहाँ से कार्गो शिप्स भी कभी कभार गुजरती है . मेक्सिको के किनारे को छोड़ के लगभग 6 महीने हो चुके थे और जोस ने अपने साथी को भी खो दिया था इसी वजह से वो काफी ज्यादा फ़्रस्ट्रेटेड भी हो चूका था एक दिन जोस को दूर समंदर में कार्गो शिप गुजरते हुए देखा . पिछले 6 महीनो में वो पहली शिप देख रहा था इस वजह से उसकी जिन्दा रहने की उम्मीद फिरसे जग गयी . जोस ने कार्गो शिप के तरफ हर तरह के इशारे किये लेकिन बदक़िस्मतीसे क्रू मेंबर को ये छोटी सी बोट नजर नहीं आयी . और फिर देखते ही देखते एक बार फिर उसकी उम्मीदों पे पानी फिर गया . इमेजिन करे की समंदर में एक एक दिन मौत से लड़ने के बाद जब आख़िरकार जान बचने का आसरा मिले और वो भी इग्नोर करके चला जाये तो कैसा लगेगा .
      फिर 11 महीनो के बाद जोस अपनी इस छोटी सी बोट पर 8000 किलोमीटर ट्रेवल कर चूका था . उसके कपड़े भी फट चुके थे और अब उसके पास सनलाइट से बचने के लिए सिर्फ एक अंडरवियर बची थी . आखिरकार वो घड़ी आयी ही गयी जब किस्मत जोस पर मेहरबान हो गयी 30 जनुअरी 2014 को यानि के पुरे 14 महीनो के बाद जोस ने आस पास पानी में नारियल तैरते हुए , देखे तभी वो समझ गया की कोई आइलैंड करीब आ चुका है . जहा नारियल पेड़ से टूट के पानी में तैर रहे है . 


       थोड़ी देर बाद जोस को आइलैंड नजर आने लगा उसको डर था की ये आइलैंड भी उससे मिस न हो जाये इसलिए वो पानी में कूद गया और तैरते हुए आइलैंड पर पोहच गया . पिछले 14 महीनो में जोसे ने पहली बार किसी जमीन पर पैर रखा था और वो वहा पोहचा तो उसे वहां एक छोटासा बीच हाउस दिखाई दिया . जिसमे वहां का लोकल मौजूद था पिछले 438 दिन में पहली बार किसी इंसान से जोस कांटेक्ट हुआ था . ये आइलैंड एक मार्शल आइलैंड का रिमोट आइलैंड था जिसको उसने देखा . अत्तोल कहा जाता है . जोस का आइलैंड उसके स्टार्टिंग पॉइंट से 11000 किलोमीटर दूर था . लेकिन ये भी जोस की किस्मत थी की वो समंदर में छोटे डॉट जितने आइलैंड पे पोहच गया था , वर्ना ये आइलैंड जैसे फिर से मिस हो जाता तो फिर अगला स्टॉप जोस को 5000 किलोमीटर दूर फ़िलीपीन्स में होता . वहा से जोस को उसके घर भेजा गया जहा पोहचते ही उसको और एक मुसीबत ने घेर लिया . जी हा वापस पोहचने पर जोस ने 438 Days के नाम से बुक पब्लिश की . लेकिन जोस पर अपने साथी को मारने का इलज़ाम लगाकर उसपर केस किया गया वही साथी जिसने जोस के मुताबिक सुसाइड किया था .

     आपको हमारी ये कहानी कैसी लगी ये आप हमे कमेंट के जरिये बता सकते है और ऐसे नए नए कहानियो के लिये हमे फॉलो करे और आप सभी को शेयर करे.

                                                              !!! धन्यवाद !!! 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी और उनके कट्टर प्रशंसक

History of Honda Company,

पद्म भूषण पुरस्कार कभी शुरू हुआ और ये पुरस्कार किन लोगो को दिया जाता है !!