एक ऐसा समंदर जिसका कोई किनारा ही नहीं है

      !! एक ऐसा समंदर जिसका कोई किनारा ही नहीं है !!



 समंदर के किनारे ज़मीन होती है?

     हम ये मानते हैं कि पानी से भरे समंदर के दूसरे छोर का शायद पता न चल सके लेकिन इसका कम से कम एक किनारा ज़रूर होता है. कई समंदर तो चारों तरफ से ज़मीन से घिरे होते हैं, जैस कि भूमध्य सागर और काला सागर. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि सागर कहां महासागर में मिल जाते हैं पता नहीं चलता लेकिन ऐसे में द्वीपों की माला को जोड़ कर देखा जाए तो इसकी जानकारी भी लगाई जा सकता है. लेकिन एक ऐसा समंदर है जिसके किसी किनारे कोई ज़मीन नहीं है. ये है सारगास्सो सागर ये अटलांटिक सागर के पश्चिम में है और उत्तर अटलांटिक में एक तरफ को मुड़ती लहरें ही इसकी सीमा बनाती हैं. अटलांटिक की मुड़ती लहरों के कारण सारगास्सो सागर का पानी शांत रहता है.

सारगास्सो सागर (Sargasso Sea) एक अनूठा समुद्री क्षेत्र है जो उत्तरी एटलांटिक महासागर में स्थित है। यह एक महत्वपूर्ण मरीचिका है जिसे सारगास्सो वन के कारण पहचाना जाता है, जो समुद्री जीवाश्म और अन्य जलीय पौधों का संकलन करता है। सारगास्सो सागर का विशालता और भूगोलिक प्राकृतिकता के कारण इसे वैज्ञानिकों और जलयात्रियों के बीच आकर्षण का केंद्र बनाया गया है। इसे पहली बार देनमार्की नेविगेटर जूलियस आर्न द्वारा 1500 ईस्वी में खोजा गया था। सारगास्सो सागर की विशेषताएं उसमें पायी जाने वाली सारगास्सो वन से आती हैं, जो मुख्य रूप से सारगास्सो घास (Sargassum) कहलाती है। यह एक ब्राउन रंग की समुद्री पौधा होती है जो महासागर की मेज़बानी पर तैरती है। सारगास्सो वन के बीच में उभरते समुद्री जीव इसे अपना घर बनाते हैं। इस क्षेत्र में कई प्रकार के मछली, केवल, कछुआ, खगोलिय और अन्य जीव पाए जाते हैं।

सारगास्सो सागर का अवलोकन करने के लिए वैज्ञानिक अभ्यासों के लिए अधिक जानकारी और समझदारी की जरूरत है। इसकी जीवविज्ञान, पारिस्थितिकी, मानवीय प्रभाव और महत्व के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए अग्रणी वैज्ञानिक संगठनों द्वारा अध्ययन जारी हैं।

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