ग्लोबल वार्मिंग की वजह से दुनिया के कोन से शहर समंदर में डूब जाएंगे !!

 

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से दुनिया के कोन से शहर समंदर में डूब जाएंगे !!


        हमें इतिहास में ऐसे शहर मिलेंगे जो पहले तो ज़मीन के ऊपर थे, आज वो समंदर के अंदर है। ग्रीस के समदर में एक 5000 साल पुराना एक शहर डूबा हुआ है। जिसको पावलोपेट्री कहा जाता है। वक़्त के साथ हमारी धरती का भूगोल बदल रहा है. और ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर पिघल ने से समंदर की स्तर बढ़ रही है. ऐसे ही समंदर का पानी बढ़ेगा तो इसमें कोई शक नहीं है कि आने वाले कुछ सालों में दुनिया के छोटे बड़े शहर पानी के अंदर डूब जाएंगे। क्या ग्लोबल वार्मिंग की वजह भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के कोन-कोन से शहर डूबेंगे? ये हम आज जानेंगे.

       कहीं ना कहीं आप सब लोगो ने ग्लोबल वार्मिंग का नाम सुन रखा है, हमारे ग्रह का तापमान दिनबदिन बढ़ रहा है। क्या वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है।तापमान की बात करे तो साल 1880 से लेकर 2022 तक हमारे पृथ्वी का तापमान 1.4 अंश सेल्सियस तक बढ़ गया है। और अगर पिछले सिर्फ 20 सालो का देखा जाए तो पिछले वाले साल के मुकाबले हर बार बढ़ता जा रहा है। नासा का मानना ​​है कि 95 % चांस है की ये ग्लोबल वार्मिंग इंसान की गतिविधियों की वजह से हो रहा है। जिसके मास स्तर पर वनों की कटाई और जीवाश्म ईंधन का इस्तमाल होना भी है. जीवाश्म ईंधन की जलने के कारण से गैस ग्रीन हाउस प्रभाव पैदा कर देती है। अब इसके नतिजे में दुनिया भर के ग्लेशियर आहिस्ता आहिस्ता पिघल रहे हैं और समंदर का पानी बढ़ रहा है। जीवाश्म ईंधन का इस्तमाल करने से पहले ही यानि के साल 1800 से लेकर 1900 तक ओसियन का लेवल सिर्फ 6 मिटर ही बढ़ चुका था . यानि तकरीबन 2.5 इंच। 



         जीवाश्म ईंधन इंसान के हाथ लगने के बाद महासागर के स्तर में काफी इज़ाफ़ा दिखा। साल 1900 से लेकर 2000 तक समंदर का स्तर तकरीबन 19 मिटर बढ़ चुका है जो पहले 100 साल के मुकाबले से तीन गुना है। इस से भी बुरी खबर ये है कि 2000 से लेकर 2022 तक यानि के सिर्फ 20 सालो में पिछले 100 साल के मुकाबले मैं लगभग डबल के हिसाब से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय और वायुमंडलीय प्रशासन का कहना है अगर इसी गति से ग्लोबल वार्मिंग हो रही है और ग्लेशियर पिघल रहे हैं तो साल 2100 तक हमारे समंदर का लेवल 2.5 मीटर तक बढ़ जाएगा। और ये चीज एक बढ़े संकट का अलार्म है. साल 2100 तक वो तटीय शहर यानी कि जो समुंदर के साथ लगी हुई है, जिन शहरों की ऊंचाई 2.5 मिटर से अंदर वो सारी शहर पानी के नीचे चली जाएगी। जैसा की थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक जिसकी ऊंचाई थाईलैंड की खाड़ी समुंदर से सिर्फ 1.5 मीटर दूर है। इसी वजह से साल 2100 में बैंकॉक पूरी तरह पानी के अंदर रहेगा। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में गंगा नदी के किनारे की ज़मीन भी पानी के अंदर होगी। अजर भाईजान की अगर बात की जाए तो बाकू का कोस्टल एरिया पूरा पानी के अंदर रहेगा। सिंगापुर के किनारे वाले सारे प्रोजेक्ट पूरी तरह डूब जाएंगे। इसके अलावा नीदरलैंड के एम्स्टर्डम, वॉटरडैम जैसे शहर कमर जितने पानी में होंगे. और मालदीव के सारे द्वीप और रिसॉर्ट्स का तो नामो निशान ही नहीं रहेगा। यानी के साल 2100 में 150 करोड लोगो को कोस्टल एरिया छोड़ कर और कहीं शिफ्ट होना पड़ेगा। ये तो बात है कि हमने 80 सालो के बाद की जो समंदर का लेवल सिर्फ 2.5 मीटर बढ़ेगा लेकिन सबसे खराब स्थिति ये है कि दुनिया में मौजुद तमाम ग्लेशियर अगर पिघल गया तो क्या होगा? एक अनुमान के हिसाब से दुनिया का तमाम ग्लेशियर इसी स्पीड से पिघलेगा तो पूरे 5000 साल बाद ग्रीनलैंड, आर्कटिक क्षेत्र, आइसलैंड और तमाम ग्लेशियर पिघल जायेंग. और इसकी वजह से हमारे सागर का लेवल 70 मीटर तक बढ़ जाएगा। लेकिन जरूरी नहीं कि ये नौबत 5000 साल बाद ही आएगी जिस तरह से इंसान प्राकृतिक संसाधनों को ख़राब करके वायु हवा ख़राब कर रहा है. लगता है ये नौबत 2000 सालो में ही आ जाएगी। इस स्थिति मैं हमारी धरती कैसी दिखेगी और हमारे उपमहाद्वीप में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश के कोन कोन से शहर पानी के नीचे चले जायेंगे।
         सबसे पहले शुरू करते हैं बंगाल की खाड़ी से आपको शायद ये देख कर शोक लगेगा कि पूरा का पूरा बांग्लादेश, बंगाल की खाड़ी के लपेटे में होगा। और इसकी राजधानी ढाका की बात है तो ये 30 मीटर यानी के 100 फीट गहरे पानी में डूब चूका होगा। इसके साथ-साथ बंगाल की खाड़ी भारत के कहीं तटीय शहरों को भी ले डूबा होगा। पानी के अंदर कलकता से लेकर मालदा तक और पटना से लेकर मुजफ्फराबाद तक सारे शहर डूब जायेंगे। बंगाल की खाड़ी की सीमा जो भारत और बांग्लादेश की सीमा पर लगती है वो 70 मीटर बढ़ने के बाद वो नेपाल और भूटान का कोस्टल कहलाया जाएगा. इसी तरह जहां अभी पूर्व भारतीय सीमा उसी तरह वो 50 किलोमीटर अंदर खिसक जाएगा और इसी कोस्टल इलाके के लोगो को कहीं और जाना पड़ेगा। अगर हम सिर्फ चेन्नई की बात करें तो ये करीब 200 फीट पानी के अंदर होगा। 1959 मैं निर्माण की गई चेन्नई में मौजुद जीवन बीमा निगम की बिल्डिंग जो भारत की सबसे ऊँची बिल्डिंग हुआ करती थी। वो पूरी बिल्डिंग पानी के अंदर होगी. चेन्नई से होते हुए पानी का लेवल तमिलनाडु और आंध्र के बॉर्डर पर जा लगेगा। भारत के पश्चिमी तट की बात की जाए तो पानी का लेवल 70 मीटर बढ़ने के बाद गोवा के समुद्र तट, रिज़ॉर्ट, होटल तमाम पानी के अंदर चले जायेंगे। ना ही मुंबई बचेगा और ना ही न्यू मुंबई क्यू के ये पूरा एरिया यानि के गुजरात के बॉर्डर तक 54 मिटर, यानि 177 फीट गहरे पानी में समा चूका होगा। यानी के लोढ़ा ट्रंप टावर अगर उस टाइम तक बच गया होगा तो उसके 15 मंजिल तक पानी आ चुका होगा। आगे बढ़कर हम गुजरात की बात करेंगे तो गुजरात एक आइलैंड बन चूका होगा। तब तक अगर इंसान बच गया तो अहमदाबाद इको बीच रिसॉर्ट से फेमस हो जाएगा। क्यों के अरेबियाई समुद्र तल अहमदाबाद का बॉर्डर तक पहुंच जाएगा।
         अब हम बात करते हैं पाकिस्तान पर पाकिस्तान के सिंध प्रांत पानी के लपेट में आ चूका होगा। कराची से लेकर नवाब शाह, शकर से होते हुए 400 किलोमीटर तक आने वाली कहीं सारे शहर 100 फीट पानी के अंदर समा जाएंगी। आबादी के  हिसाब से दुनिया का 7 वा शहर कराची पानी के अंदर 190 फीट अंदर डूब जाएगा। जो आज यहां जो जानिमानी बिल्डिंग, स्काई स्क्रेपर्स है वो हमें उस वक़्त पानी के अंदर दिखेगी। इसके अलावा जो पाकिस्तान के सदरान कोस्टल पे जो सबसे गहरे बंदरगाह ग्वादर के नाम से जाना जाता है . वो तब वक्त मैं गहरे सागर में डूब जाएगा.और सिर्फ वाहा पे एक आइलैंड ही रह जाएगा.

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