Unknown Fact about Ocean

      


      हमारे दुनिया का 75 % भाग पानी से घिरा हुआ है और 25 % जमींन से. लेकिन हैरानी की बात ये है की जमींन का 25 % पार्ट भी पूरी तरह किसीने नहीं देखा है. एक्सपर्ट का मानना है की जमींन का आधे से ज्यादा पार्ट अभी तक एक्स्प्लोरर नहीं किया गया. पृथ्वी का ये एक हिसा आर्कटिक क्षेत्र , घने और खौफनाक जंगल , बादल से बात करने वाले पहाड़ और दूर दूर तक फैले रेगिस्तान है. जहां इंसान का जाना मुश्किल माना जाता है. लेकिन हमें पता तो है की इन जगह पर आखिर है क्या पर कुछ ऐसे जगह है जो इंसान को भी पता नहीं है . और वो जगह है समंदर . इसके बारे में इंसान सिर्फ 5% ही जान चूका है. हमें ये भी मालूम नहीं है की समन्दर कितना ज्यादा घेहरा है और इसमें मछलियों के अलावा कोण कोण से जिव रहते है. आखिर समंदर के दीपेस्ट पॉइंट पर कौनसे कौनसे राज़ छुपे है.

       समंदर इतना ज्यादा घेहरा है की हमारी सोच इमेजिन भी नहीं कर सकती. शोधकर्ता और साइंटिस्ट के मुताबिक अगर दुनिया के सारे पहाडो को , सारे जमींन को और सारी बिल्डिंग को काट कर समंदर में फेंक दे तो दुनिया पुरे 3 किलोमीटर गहरे पानी से भर जायेगी. समंदर के इस गहरायी के बारे में शोधकर्ता के एस्टीमेट को समझने के लिए हम समंदर के सरफेस से शुरू करते है.
     ओसियन के सरफेस से 40 मीटर नीचे तक का एरिया वो है जहां तक स्कूबा डाइवर्स को जाना अनुमति होती है. इसके बाद 93 मीटर की गहरायी पर प्रसिद्ध शिप लुसितानिअ का मलबा मिला था जो 1950 में डूब गयी थी. इससे थोड़ा सा ही आगे यानि के 100 मीटर की गहरायी डाइवर्स के लिए बोहोत ही कठिन होती है. क्यू के गहरे समुद्र में गोताखोर सही से गोता न लगा सके तो पानी के प्रेशर से उनकी मौत हो सकती है. लेकिन सब के बावजूद भी हर्बर्ट निट्सच नामी ऑस्ट्रेलियाई गोताखोर ने 214 मीटर की गहरायी तक गोता लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. और हर्बर्ट ने पूरा रिकॉर्ड एक साँस में बनाया था. और यहाँ से और नीचे जाये यानि के 332 मीटर की गहरायी पर हमारे पास स्कूबा डाइविंग का वर्ल्ड रिकार्ड्स मौजूद है. और ये रिकार्ड्स मिस्र (Egypt) के अहमद गबर ने बनाया था. अहमद और 111 मीटर नीचे जाता तो गहरायी होती 443 मीटर और ये गहरायी इतनी ही है जितनी न्यूयोर्क स्टेट एम्पायर बिल्डिंग ऊँची है. 


     इससे और थोडा निचे जाये यानि के 500 मीटर यहाँ पर दुनिया की सबसे बड़ी फिश ब्लू व्हेल गोता कर सकती है. ब्लू व्हेल का वजन 1 लाख 50 हजार किलो होता है. और समन्दर में गोता करते ही ब्लू व्हेल 500 मिटर निचे जा सकती है. अमेरिकी सी वुल्फ पनडुब्बी जो एक एडवांस नुक्लेअर सबमरीन है वो भी 500 मीटर तक ही जा सकती है. और यहाँ से नीचे पानी का प्रेशर अपना रंग दिखाना शुरू कर देता है. 535 मीटर नीचे पानी का प्रेशर इतना होता है की जितना एक इंसान पर एक मोटी भैंस खड़ी हो जाये. लेकिन एपेरियर पेंगुइन को इतना प्रेशर सेहने की क्षमता होती है. इसीलिए वो इतना निचे आसानीसे तैर सकती है. और आगे 830 मिटर की गहरायी तक जाया जाये तो वो बुर्ज खलीफा के टॉप तक जायेगा अगर उसको उलटा करके समदर में रखा जाये. ये समदर का वो पॉइंट है जहां तक सूरज की रौशनी पोहच सकती है. थोड़ा और नीचे चला जाये यानि के 1000 मिटर पर समंदर का वो हिस्सा शुरू हो जाता है जिसको स्केरी जोन कहा जाता है. यहाँ से नीचे सूरज की रौशनी नहीं पोहच सकती और यहाँ पे सिर्फ अँधेरा ही अँधेरा पाया जाता है. यहाँ पर पानी का प्रेशर 1500 PSI हो जाता है जितना की एक अफ्रीकन बफैलो एक छोटे से सिक्के पे पूरा खड़ा हो जाये. हैरतंगेज तौर पे इतना निचे जायंट स्क्विड भी पाये जाते है जो के डीप सी की एक खौफनाक जिव है. और निचे जाये तो 1280 मिटर की गहरायी पर लेदरबैक समुद्री कछुआ पाये जाते है. ये कछुआ दुनिया के तमाम कछुआ के मुकाबले काफी बड़े होते है. इनका वजन 700 किलोग्राम तक होता है. 2000 मिटर की गहरायी पर ब्लैक ड्रैगन फिश पायी जाती है . ये समन्दर में अँधेरे की तरह बिलकुल ब्लैक होती है . जिसको सिर्फ फ्लैश लाइट्स से ही देखा जा सकता है. लेकिन इसकी अपनी आँखे इतनी तेज होती है की ये अँधेरे में भी आसानीसे देख सकती है . समंदर में थोड़ा और नीचे जाये यानि के 2250 मिटर की गहरायी पर स्पर्म व्हेल और कोलोसोल स्क्विड दिखाई देती है . ये कोलोसोल स्क्विड 15 मीटर लम्बी होती है और इनका वजन 760 किलोग्राम  इतना होता है. और इनकी एक आँख खाने के प्लेट जितनी बड़ी होती है . इनके जाल में तेज धार दाँत लगे होते है जिनसे ये अपने शिकार को जकड कर मार सकती है. कोलोसोल स्क्विड और स्पर्म व्हेल एक दूसरे के दुश्मन होते है. दो रोड रोलर जितने भारी वजन के स्पर्म व्हेल को कोलोसोल स्क्विड जकड लेती है . और आसानीसे उसको मार सकती है.


      समन्दर की ये गहरायी तो अभी शुरुवात है. 3800 मिटर की गहरायी पर फेमस टाइटैनिक जहाज का मलबा अभी तक मौजूद है. इससे 200 मिटर और गहरायी में यानि के 4000 मिटर की गहरायी में जाये तो ओसियन का हिस्सा है जिसको एब्बेसाल जोन कहा जाता है. यहाँ हैरतंगेज तौर पर पानी का प्रेशर 11000 PSI हो जाता है जो की एक बड़े हाथी को एक छोटे से कॉइन पर खड़ा किया जाये इतना होता है. और यहाँ इस जगह पे अजीबो गरीब मछलियां पाई जाती है. जैसा की फैंगटूथ , एंगलर, वाइपर मछलिया . इसके बाद और निचे जाये यानि के 4781 मिटर की गहरायी में वर्ल्ड वॉर 2 में क्रैश होने वाली बैटल शिप का मलबा मौजूद है. 6000 मिटर निचे जाये तो समन्दर का ऐसा हिस्सा शुरू हो जाता है जिसको द हडल जोन कहा जाता है. इसको ये नाम इस वजह से दिया गया की कलीम यूनानी धर्म में एडिस मौत के फ़रिश्ते को कहा जाता था. और ये माना जाता था की मौत के बात एडिस ख़राब लोगो को समंदर की गहरायी में ले जाता है. खैर इस जोन में पानी का प्रेशर समंदर के सरफेस के मुकाबले में 1100 गुना हो जाता है . यहाँ का प्रेशर इतना होता है के एक बेहतरीन बुलेट प्रूफ कार को एक झटके में पूरा फाड़ सकता है. इससे ज्यादा और निचे जाये यानि के 6500 मीटर की गहरायी है जहाँ तक यूनाइटेड स्टेट्स की शोधकर्ता सबमरीन जा सकती है. इसको DSV एल्विन कहा जाते है और ये वही सबमरीन है जिसने फेमस टाइटैनिक का खोज किया था. इसके नीचे यानि के 8840 मिटर की गहरायी पर माऊंट एवेरेस्ट का टॉप आ सकता है अगर उसको समदर में उल्टा रखा जाये. इसके बाद 10898 मिटेर की गहरायी में वो जगह आ जाती है जहाँ पर जेम्स कैमरून जो फिल्म निर्माता 2012 में अपने सबमरीन में गया था. लेकिन 1960 में डॉन वाल्श और जैक्स पिकार्डस नामी लोगो ने इससे भी नीचे यानि के 10916 मिटर का रिकॉर्ड बनाया था. ये दोनों ट्राइवेस्ट नामी पनडुब्बी मैं 10916 मीटर की गहरायी तक गए थे. इस सबमरीन को यहाँ पोहचने के लिए पूरे 5 घण्टे लगे थे लेकिन यहाँ पर पानी का प्रेशर इतना ज्यादा था की सबमरीन के एक हिस्से में क्रैक पड़ गया इसी वजह से उनको तुरन्त ऊपर जाना पड़ा. समंदर में और निचे जाये यानि के 10972 मिटर पे ये गहरायी इतनी ही होती है जितना ऊँचा एक कमर्शियल प्लेन फ्लाई करता है. इतनी ऊंचाई से जहाज के विंडो से नीचे देखने में जो फीलिंग आती है बस इतना हिस्सा समदर के निचे है . और आखिर में इंसान जिस गहरायी तक जा चूका है वो कमर्शियल प्लेन के उचाई से ज्यादा है और वो तक़रीबन 11000 मिटर बनती है. समंदर के इस पॉइंट तक जाने वाला शख्स फॉर्मर नोवल ऑफिसर विक्टर विस्कोवो है. विक्टर ने ये कारनामा डीप सी सबमर्सिबल लिमिटिंग फैक्टर में बैठकर अकेले ही अंजाम दिया था. 


      समंदर की ये जगह चैलेंजर डीप के नाम से जानी जाती है. जो गुआम आइलैंड से 300 किलोमीटर्स दूर है. समंदर के सरफेस से 11000 मिटर या फिर 35000 फ़ीट निचे जाने के बाद भी शोधकर्ता का मानना है की ये दीपेस्ट पॉइंट नहीं है. ये सिर्फ समंदर का वो पॉइंट है जहां तक इंसान पोहच चूका है. अभी तक इंसान ने समंदर में जो कुछ भी देखा है और जहाँ कही भी गया है वो समन्दर का सिर्फ 5 % हिस्सा माना जाता है. यानि के समंदर के 95 % हिस्से में कौन कौनसे जिव पाए जाते है और वह पर कोनसे राज़ बसे है ये किसीको भी अभी तक मालूम नहीं हुआ है.

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